Thursday, July 19, 2018

                                                              मनुष्य का सोच 

मनुष्य जैसा सोचता है उसे संसार वैसा ही दिखाई देता है। क्योकि यह संसार एक दर्पण की भाती है इसमें हम अपने आप को जैसा देखना चाहेंगे वैसा ही देख पाएगें हमें दुसरो के प्रति ऐसा बेवहार नहीं करना चाहिए जो अपने लिए उचित न लगे क्योकि सामने वाला मनुस्य एक दर्पण की भाटी ही कार्य करता है यह प्रकृति का नियम है की आप अन्य लोगो के प्रति जैसा सोचेंगे अन्य लोग भी आप के प्रति वैसा ही सोचेंगे 
इसका उदाहरण भी हम अपनी दिनचर्या में देख सकते आप किसी कुए के पास जाए और उसमे देखे तो आप को अपनी ही क्रियाकलाप का  चित्रण दिखाई  देगा  आप गुस्सा करेंगे  तो उस कुए में भी गुस्सा करता हुआ व्यक्ति दिखाई  देगा। इसलिए हमें सबके प्रति सामान प्रेम बेवहार रखना चाहिए और  भी किसी को छोटा नहीं समझना चाहिए क्योकि हर मनुस्य के अंदर एक अनमोल गुण छिपा होता है  और आप कभी भी ऐसे शब्द का प्रयोग न करे जिससे उस व्यक्ति को दुःख हो 
जिसके कारण लोग आप के प्रति अच्छी सोच और प्रेम रखे और हमें कुछ ऐसा करने का सोच रखनी चाहिए जिससे लोग हमें याद करे और कहे की है यह भी भारत माता का एक लाल है 

Wednesday, July 11, 2018

                                                  बच्चो का पढाई में रूचि नहीं होना 

कहा जाता है कि बच्चे भगवान  का स्वरुप होते है। बच्चे के जन्म लेते ही माता -पिता अपने बच्चे के जीवन को प्रकाशवान और अच्छा बनाने के लिए चिंतित होने लगते ही। हर माता -पिता चाहता है कि  मेर बच्चा मुझसे  भी आगे निकले धीरे -२ बच्चे के बड़े होने पर बच्चे के पढाई के लिए चिंतित होने लगते है लेकिन बच्चे के पढाई  के लिए चिंतित होने वाले अभिभावक हमें समाज  में दो प्रकार के देखने को मिलके है १. वे जो अपने बच्चे के पढाई को पूर्ण रुपए से  गुरु और धन  के बल पर छोड़ देते है   २. वे जो अपने बच्चेके  पढाई को गुरु के साथ -साथ खुद अपने बच्चे को समय -समय पर निर्देशित करते रहते है  और और बच्चे के दिनचर्या पर ध्यान देते है 


अतः  हमें चाहिए है कि  बच्चो  को बचपन से ही नियमित रुप  से पढाई के साथ - साथं  उनके सभी क्रिया कलाप के ऊपर ध्यान देना चाहिए बच्चे के भोजन ,  खेल - खुद , रहन -सहन।, पहनावा , बोपल - चल , संगत और सभी क्रियाओ पर विशेष  रुपए से ध्यान देना चाहिए माता -पिता के अपने बच्चे को सकरात्मक परिवेश में रखना चाहिए और पढाई वाले माहौल में अधिक रखना चाहिए जिससे बच्चे का शुरू से ही पढाई में रूचि बनी रहे.  








































































































Wednesday, July 4, 2018

                                                            दिमाग की खुराक 

मनुष्य अपने शरीर  को हष्ट पुष्ट  करने के लिए कितने अधिक उपाय करते है !!!जैसे काजू ,किशमिस, मलाई ,दुध ,दही ,मेवा वगैरह -वगैरह बहुत सारी  चीजे खाते है इसके  आलावा रियाज ,व्यायाम,कसरत ,मेहनत करते है तक की मालिस करते है और भी पता नहीं क्या क्या करते है लेकिन जरा सोचे !!!की हम अपने दिमाग को पुष्ट करने के लिए ,दुरुश्त करने के लिए हम क्या करते है ???आप सोच रहे होंगे क्या ???ये क्या बेहूदा बात है ???लेकिन ये सोचे है     

आज हम अपने हैण्ड राइटिंग के विषय में बात करने जा रहे है दोस्तों हैण्ड राइटिंग का बहुत प्रभाव पङता है हमारे बोर्ड परीक्षा में हमे अपने रा...