Saturday, November 10, 2018

आज हम अपने हैण्ड राइटिंग के विषय में बात करने जा रहे है दोस्तों हैण्ड राइटिंग का बहुत प्रभाव पङता है हमारे बोर्ड परीक्षा में हमे अपने राइटिंग को सुधारने के लिए प्रतिदिन दो या तीन पेज लेख अंग्रेजी व् हिंदी लिखना चाहिए हमारी राइटिंग की हमारी छवि दर्शाता है अध्यापक के पास  हमारी कॉपी  जाती है तो वह सबसे पहले लिखावट को देखना चाहिए और उशके अनुशार ही कपि चेक करता इस  हमें अपने परिस्थति से लड़ते हुए अपने निरंतर कार्य को करना चाहिए हमारे पाश किसी भी प्रकार का शांकत आ जय  हमें अपने नित कार्य को छोड़ना नहीं चाहिए जैसे लेख।   जाना आदि  भी कुछ  यह  लिखना चाहिए की यह कोई और चेक करेगा इशलिए  उसे सदैव साफ  सुंदर मात्रावो व् अछरो में लिखना चाहिए हमें विशेष ध्यान हेडिंग  चाहिए  सदैव काळा पेन से  लिखना चाहिए और अक्षरों और शब्दों  का माथा पूरा पूरा भरना चाहिए और उसे  रेखांकित कर देना  चाहिए बोर्ड परीक्षा के पूर्व ही हमारे विद्यालय में आंतरिक मूल्यांकन की परीक्षा होती है जिसके अंतर्ग्रत हमें अपने अध्यापक को प्रोजेक्ट के रूप में लेख लिख कर देना होता इसमें भी राइटिंग का विशेष प्रभाव पड़ता है अध्यापक राइटिंग के आधार पर अंक निर्धारितकरता है दोस्तों हमारे साथ कई बार ऐसा होता है की रिजल्ट आने पर सभी कहते है की वह हमसे पड़ने में कमजोर था फिर भी हमसे ज्यादा अंक प् गया लेकिन आज तक होए इसका कारण नहीं जान सके दोस्तों आप को यह जान कर आस्चर्य होगा की वह भी अपने सुंदर व् साफ लेख की वजह से आप से ज्यादा अंक पाया है यह सुनकर बहुत ही कस्ट होता है की काश हम भी अपने राइटिंग पर ध्यान दिए होते क्योकि यह अंकपत्र सदैव के लिए बनता है फिर वह नहीं बनेगा इसलिए दोस्तों आप अपने प्रतिदिन के समय में से कुछ समय अपने राइटिंग के लिए भी निकालिए हमें अपने राइटिंग को बोर्ड या दिद्यालय तक ही सिमित नहीं रखना है वह अन्य जगह पर भी हमारी योग्यता को दर्शाता है जैसे नैकरी के लिए,काकपटिसँ में आदि।
जिस प्रकार बाग में फूल न हो तो वह बाग फीका फीका लगता है  








































                                 raiting aa 

Thursday, July 19, 2018

                                                              मनुष्य का सोच 

मनुष्य जैसा सोचता है उसे संसार वैसा ही दिखाई देता है। क्योकि यह संसार एक दर्पण की भाती है इसमें हम अपने आप को जैसा देखना चाहेंगे वैसा ही देख पाएगें हमें दुसरो के प्रति ऐसा बेवहार नहीं करना चाहिए जो अपने लिए उचित न लगे क्योकि सामने वाला मनुस्य एक दर्पण की भाटी ही कार्य करता है यह प्रकृति का नियम है की आप अन्य लोगो के प्रति जैसा सोचेंगे अन्य लोग भी आप के प्रति वैसा ही सोचेंगे 
इसका उदाहरण भी हम अपनी दिनचर्या में देख सकते आप किसी कुए के पास जाए और उसमे देखे तो आप को अपनी ही क्रियाकलाप का  चित्रण दिखाई  देगा  आप गुस्सा करेंगे  तो उस कुए में भी गुस्सा करता हुआ व्यक्ति दिखाई  देगा। इसलिए हमें सबके प्रति सामान प्रेम बेवहार रखना चाहिए और  भी किसी को छोटा नहीं समझना चाहिए क्योकि हर मनुस्य के अंदर एक अनमोल गुण छिपा होता है  और आप कभी भी ऐसे शब्द का प्रयोग न करे जिससे उस व्यक्ति को दुःख हो 
जिसके कारण लोग आप के प्रति अच्छी सोच और प्रेम रखे और हमें कुछ ऐसा करने का सोच रखनी चाहिए जिससे लोग हमें याद करे और कहे की है यह भी भारत माता का एक लाल है 

Wednesday, July 11, 2018

                                                  बच्चो का पढाई में रूचि नहीं होना 

कहा जाता है कि बच्चे भगवान  का स्वरुप होते है। बच्चे के जन्म लेते ही माता -पिता अपने बच्चे के जीवन को प्रकाशवान और अच्छा बनाने के लिए चिंतित होने लगते ही। हर माता -पिता चाहता है कि  मेर बच्चा मुझसे  भी आगे निकले धीरे -२ बच्चे के बड़े होने पर बच्चे के पढाई के लिए चिंतित होने लगते है लेकिन बच्चे के पढाई  के लिए चिंतित होने वाले अभिभावक हमें समाज  में दो प्रकार के देखने को मिलके है १. वे जो अपने बच्चे के पढाई को पूर्ण रुपए से  गुरु और धन  के बल पर छोड़ देते है   २. वे जो अपने बच्चेके  पढाई को गुरु के साथ -साथ खुद अपने बच्चे को समय -समय पर निर्देशित करते रहते है  और और बच्चे के दिनचर्या पर ध्यान देते है 


अतः  हमें चाहिए है कि  बच्चो  को बचपन से ही नियमित रुप  से पढाई के साथ - साथं  उनके सभी क्रिया कलाप के ऊपर ध्यान देना चाहिए बच्चे के भोजन ,  खेल - खुद , रहन -सहन।, पहनावा , बोपल - चल , संगत और सभी क्रियाओ पर विशेष  रुपए से ध्यान देना चाहिए माता -पिता के अपने बच्चे को सकरात्मक परिवेश में रखना चाहिए और पढाई वाले माहौल में अधिक रखना चाहिए जिससे बच्चे का शुरू से ही पढाई में रूचि बनी रहे.  








































































































Wednesday, July 4, 2018

                                                            दिमाग की खुराक 

मनुष्य अपने शरीर  को हष्ट पुष्ट  करने के लिए कितने अधिक उपाय करते है !!!जैसे काजू ,किशमिस, मलाई ,दुध ,दही ,मेवा वगैरह -वगैरह बहुत सारी  चीजे खाते है इसके  आलावा रियाज ,व्यायाम,कसरत ,मेहनत करते है तक की मालिस करते है और भी पता नहीं क्या क्या करते है लेकिन जरा सोचे !!!की हम अपने दिमाग को पुष्ट करने के लिए ,दुरुश्त करने के लिए हम क्या करते है ???आप सोच रहे होंगे क्या ???ये क्या बेहूदा बात है ???लेकिन ये सोचे है     

Friday, June 29, 2018

aapka lakshya kya hai???

                      आपका लक्ष्य क्या है ???                      आप से मेरा सीधा सा यह सवाल है कि आप का लक्ष्य क्या है ?आप इस बारे मेँ  क्या सोचते हो?कि आप किस मुकाम पर पहुंचना चाहते हो ?आने वाले आठ दस वर्षों  में आप क्या करने वाले हो ?आप क्या ऐसा करने वाले हो ?जिससे दुनिया आप को याद करे।आप इस दुनिया को क्या ऐसा देने वाले हो ?जिससे दुनिया आप के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानने के लिए उत्सुक हो जाये !आप ऐसा कौन सा काम करने वाले हो ?जिससे दुनिया आप को मरने के बाद भी याद करे ?इस बारे  में आप क्या कहना चाहते हो ?अगर आपके पास इस बारे में कहने के लिए बहुत कुछ है !इसका मतलब यह है कि आपने अपना  लक्ष्य निर्धारित कर रखा है !और यह बड़े खुशी की बात है! अगर आप अपने लक्ष्य पर पुरे मेहनत, लगन और  ईमानदारी से काम करते है और आपका दिमाग लक्ष्य को कैसे पुरे किया जाय, लक्ष्य के मार्ग में आने वाली कठिनाइयों को कैसे पार किया जाये, इस दिशा में बराबर लगा रहता है! तो निश्चित रूप से आप अपने लक्ष्य को जरूर पा लेंगे! लेकिन यदि आप के पास इस बारे में बोलने के लिए कुछ भी नहीं है और इन  सवालों के जवाब देने के लिये आपके मन में ये विचार आ रहे हो कि अरे मैंने तो कभी इस बारे में नहीं सोचा! अभी तो मैं  विद्यार्थी हुं ! अभी मैं पढाई कर रहा हुं! अभी तो मैं यह कोर्स कर रहा हुँ! अभी तो मैं   यह काम कर रहा हुं  अभी इस बारे कुछ सोचने की क्या जरुरत है?तो यह आपके लिए बड़े दुःख की बात है !!!इन सब बातों  का यह सीधा सा मतलब है अापने अपना कोई लक्ष्य ही नहीं बनाया है। इन लाइनों को लिखते हुए मुझे एक बेहतरीन लाइन याद आ रही है जिसका जिक्र मैं यहाँ कर रहा हुं  कि सौ दिन जीकर कुछ  भी न करने की बजाए,एक दिन जीकर ही क्यों न कुछ ऐसा किया जाये कि लाखो दिनों तक दुनिया आपको याद  करती रहे! साथियों  लक्ष्य को निर्धारित करने से  हमें बहुत से फायदे हो सकते है जैसे लक्ष्य इंसान का हर समय मार्गदर्शन करता रहता है! हमारे मित्र कैसे होने चाहिए! हमारे पास कौन सी डिग्री होनी चाहिए! लक्ष्य किसी इंसान को जिन्दा रख सकती है !लक्ष्य से हमें जीने की वजह मिलती है !जब हम काम करते-करते थक जाते है और निराश  होने लगते है एक बार आँखे बंद कर के लक्ष्य को याद भर कर लेने  से हम नई ऊर्जा और उत्साह से भर जाते है और हमें अपने काम को जारी रखने की अंदर से प्रेरणा मिलती है लक्ष्य हमारे काम में जान डाल देती है और उसे बेहतरीन बनाती है लक्ष्य हमारे जीवन स्तर को ऊँचा उठाती है! लक्ष्य हमारे बैंक बैलेंस को बढाती है और जीवन में खुशियाँ लाती हैं!इसलिए जीवन में एक लक्ष्य निर्धारित करे !ईमानदारी से लक्ष्य तक पहुंचने के लिए हर दिन प्रयास करें !आप एक दिन जरूर एक सफल व्यक्ति बन जायेंगे।  

Thursday, June 28, 2018

                             खुद को जाने !!!                                    प्रकृति अदभुत रहस्यों का महाभंडार है। तथा इसमें अद्वितीय रचनाएं  निहित है। जिसमें  मनुष्य की  रचना सर्वोपरि है। मनुष्य को प्रकृति ने अनेक प्रकार की शक्तियाँ  प्रदान की है जैसे कि  शारिरीक शक्ति ,मानसिक शक्ति, बौद्धिक शक्ति, आध्यात्मिक शक्ति और चारित्रिक शक्ति।परन्तु वर्तमान समय में  जीवन की रफ़्तार ने मनुष्य को एक मशीन सदृश बनाकर रख दिया है आज का मानव जैसे खुद को ही भुल सा गया है सुबह उठते ही वह  भागदौड़ में लग जाता है और व्यस्त दिनचर्या के बाद थककर रात को घर पर आकर सो जाता  है और अगले सुबह फिर  वही प्रक्रिया  शुरू हो जाती है और पूरा जीवन यूं  ही समाप्त हो जाता  है यदि हम खुद पर भी और खुद की दिनचर्या पर भी चिंतन करे तो हम पायेगे कि हम जिस भीं  स्थिति  में हैं वह स्थिति बेहतर हो सकती है और यदि बेहतर है तो और बेहतर हो सकती है परन्तु हम अपने आपको इतना व्यस्त मानते है कि  कभी इसके लिए सोचते ही नहीं है और प्रयास भी नहीं करते है। हम दीनदु:खी होने का दुँखड़ा गाते रहते है जबकि प्रकृति ने हमें देवता बनने की शक्ति  प्रदान की है खुद को जान कर हम जीवन में सफलता के चरमोत्कर्ष  पर पहुँच  सकते है जो शक्तियां  प्रकृति ने हमें प्रदान की है हमें उन शक्तियों को प्रोत्साहित,पल्लवित व संवर्धित करना चाहिए। 
          मनुष्य के अन्दर मानसिक और आध्यात्मिक शक्तियों जैसी अनेक प्रकार शक्तियां निहित है ये शक्तियां अत्यंत दिव्य है इसका प्रत्यक्ष प्रमाण हम देख सकते है जैसे कि  यदि हम स्कार्पियो कार और एक अच्छे घर के बारे में सोचकर यदि आँखे  बंद कर के सोचे तो ऐसा लगेगा कि  हम किसी आलिशान बंगले के सामने खड़े है जहाँ  सामने एक नई स्कॉपियो खड़ी होगी इसी प्रकार आध्यात्मिक शक्तियाँ  भी ऐसी काम करती है कि  हमारी आयु तक बढ़ा सकती है और अनेक चमत्कार कर सकती है अतः मनुष्य को यह चाहिए की वह ख़ुद  को जाने ,ख़ुद  को पहचाने, खुद पर विश्वास  करे! मनुष्य जीवन में बहुत कुछ कर सकता है इसीलिए आप यह सोचे की आपका जन्म किसी खास उद्देश्य को पूरा करने के लिए हुआ है  आप दिल से काम करे एक दिन ऐसा जरूर आएगा कि  आप अपने मंजिल को जरूर हासिल करेंगे !!! 

आज हम अपने हैण्ड राइटिंग के विषय में बात करने जा रहे है दोस्तों हैण्ड राइटिंग का बहुत प्रभाव पङता है हमारे बोर्ड परीक्षा में हमे अपने रा...