Thursday, July 19, 2018

                                                              मनुष्य का सोच 

मनुष्य जैसा सोचता है उसे संसार वैसा ही दिखाई देता है। क्योकि यह संसार एक दर्पण की भाती है इसमें हम अपने आप को जैसा देखना चाहेंगे वैसा ही देख पाएगें हमें दुसरो के प्रति ऐसा बेवहार नहीं करना चाहिए जो अपने लिए उचित न लगे क्योकि सामने वाला मनुस्य एक दर्पण की भाटी ही कार्य करता है यह प्रकृति का नियम है की आप अन्य लोगो के प्रति जैसा सोचेंगे अन्य लोग भी आप के प्रति वैसा ही सोचेंगे 
इसका उदाहरण भी हम अपनी दिनचर्या में देख सकते आप किसी कुए के पास जाए और उसमे देखे तो आप को अपनी ही क्रियाकलाप का  चित्रण दिखाई  देगा  आप गुस्सा करेंगे  तो उस कुए में भी गुस्सा करता हुआ व्यक्ति दिखाई  देगा। इसलिए हमें सबके प्रति सामान प्रेम बेवहार रखना चाहिए और  भी किसी को छोटा नहीं समझना चाहिए क्योकि हर मनुस्य के अंदर एक अनमोल गुण छिपा होता है  और आप कभी भी ऐसे शब्द का प्रयोग न करे जिससे उस व्यक्ति को दुःख हो 
जिसके कारण लोग आप के प्रति अच्छी सोच और प्रेम रखे और हमें कुछ ऐसा करने का सोच रखनी चाहिए जिससे लोग हमें याद करे और कहे की है यह भी भारत माता का एक लाल है 

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