Wednesday, July 11, 2018

                                                  बच्चो का पढाई में रूचि नहीं होना 

कहा जाता है कि बच्चे भगवान  का स्वरुप होते है। बच्चे के जन्म लेते ही माता -पिता अपने बच्चे के जीवन को प्रकाशवान और अच्छा बनाने के लिए चिंतित होने लगते ही। हर माता -पिता चाहता है कि  मेर बच्चा मुझसे  भी आगे निकले धीरे -२ बच्चे के बड़े होने पर बच्चे के पढाई के लिए चिंतित होने लगते है लेकिन बच्चे के पढाई  के लिए चिंतित होने वाले अभिभावक हमें समाज  में दो प्रकार के देखने को मिलके है १. वे जो अपने बच्चे के पढाई को पूर्ण रुपए से  गुरु और धन  के बल पर छोड़ देते है   २. वे जो अपने बच्चेके  पढाई को गुरु के साथ -साथ खुद अपने बच्चे को समय -समय पर निर्देशित करते रहते है  और और बच्चे के दिनचर्या पर ध्यान देते है 


अतः  हमें चाहिए है कि  बच्चो  को बचपन से ही नियमित रुप  से पढाई के साथ - साथं  उनके सभी क्रिया कलाप के ऊपर ध्यान देना चाहिए बच्चे के भोजन ,  खेल - खुद , रहन -सहन।, पहनावा , बोपल - चल , संगत और सभी क्रियाओ पर विशेष  रुपए से ध्यान देना चाहिए माता -पिता के अपने बच्चे को सकरात्मक परिवेश में रखना चाहिए और पढाई वाले माहौल में अधिक रखना चाहिए जिससे बच्चे का शुरू से ही पढाई में रूचि बनी रहे.  








































































































No comments:

Post a Comment

आज हम अपने हैण्ड राइटिंग के विषय में बात करने जा रहे है दोस्तों हैण्ड राइटिंग का बहुत प्रभाव पङता है हमारे बोर्ड परीक्षा में हमे अपने रा...